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परिवर्तन

परिवर्तन संसार का अटल नियम है, और मुझे लगता है कि यह बात बिल्कुलसही है। हम लोग हमेशा से ही देखते और सुनते आ रहे हैं। आज हम जिस समाज में रहते हैं अगर उसकी बात करें तो हम देखेंगेकी पहले हम क्या थे और अब क्या है। और आगे चल कर हम क्या रहेंगे।इस संसार में हर पल हर क्षण कुछ ना कुछ परिवर्तनहोता रहता है। इस परिवर्तनसे कभी हम दुखी हो जाते हैं तो कभी खुश। अपने आप को ही ले लीजिए। पहले हम बाल अवस्था में आते हैं, फिर युवावस्था में और अंत में प्रौढ़ावस्था में, बचपन से लेकर आज तक हमारे अंदर विभिन्नप्रकार के बदलाव आए। परिवर्तनमुख्यतःदो प्रकार से होता है एक तो वह परिवर्तनजो प्रकृतिद्वारा किए जाते हैं और दूसरे प्रकार के परिवर्तनवह होते हैं जो मनुष्य खुद करता है। प्राकृतिक परिवर्तन हमारे बस में नहीं होते हैं जैसे -बीमारी, दुर्घटना , मृत्यु , प्राकृतिक आपदा आदि। तथा दूसरा परिवर्तनमानव खुद अपने जीवन में करता है क्योंकिउसे हर समय सुख की चाह होती है इसलिए परिवर्तनका क्रम उसके जीवन में लगातार चलता रहता है।


समय के साथ परिवर्तनहोता रहता है इसमें दिल छोटा करने या घबराने वाली बात नहीं है। जीवन का दूसरा नाम ही परिवर्तनहै। परिवर्तननहीं तो कुछ भी नहीं, परिवर्तनका सामना करने का सबसे सही उपाय यह है कि उसका स्वागत किया जाए। बीते समय का मोह को छोड़कर आगे बढ़े और अपना समय बीते हुए समय के पछतावे में नष्ट नहीं करें। पुराना जाता है तभी नया समय आएगा, यही संसार का नियम है। तथा जीवन में आए परिवर्तनों को सहर्ष स्वीकारकरें और उसका पूरा आनंद ले।

धन्यवाद

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