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विश्व हिंदी दिवस

निज भाषा का नहीं गर्व जिसे, क्‍या प्रेम देश से होगा उसे,

वहीं वीर देश का प्‍यारा है, हिंदी ही जिसका नारा है |

भाषा का कार्य है अभिव्यक्ति। अपनी बात दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने का माध्यम भाषा होती है। एक भाषा अपने आप में गरिमामय है। भाषा को लेकर जो जंग अक्सर छिड़ जाया करती है जैसे अंग्रेजी और हिंदी में वह गलत है। आज से कई वर्ष पूर्व भी ऐसा संस्कृत और हिंदी के बीच होता आया है। बहुधा भाषा के चक्कर में विषय की महत्ता को नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है।

विश्व हिंदी सम्मेलन की संकल्पना राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा द्वारा की गई थी। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के ही तत्वाधान में तीन-दिवसीय प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार को बढ़ाने के लिए वर्ष 2006 में भारत के पूर्व प्रधान मंत्री डॉ० मनमोहन सिंह ने प्रत्येक 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की थी। हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए हिंदी सम्मेलनों की शुरुआत हुई। हिंदी का पहला विश्व सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ था इसी कारण 10 जनवरी विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रवेश पाकर विश्वभाषा के रूप में समस्त मानवजाति की सेवा की ओर अग्रसर हो। साथ ही यह किस प्रकार भारतीय संस्कृति का मूलमंत्र वसुधैव कुटुंबकम विश्व के समक्ष प्रस्तुत करके एक विश्व एक मानव-परिवार की भावना का संचार करे।

आज विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर गजेरा इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने पोस्टर मेकिंग, कार्ड मेकिंग, देश भक्ति गीत तथा काव्य प्रतियोगिता की प्रस्तुति की|

विश्व हिन्दी दिवस मनाने का हमारा प्रयोजन है, विद्यार्थियों में सामाजिकता, सामूहिकता और संगठनात्मकता की भावना विकसित करना|







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