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विद्यार्थी परिपेक्ष में संस्कृति का महत्त्व


  • किसी भी देश की संस्कृति उस देश की धरोहर होती है । संस्कृति के द्वारा ही कोई भी देश प्रतिबिंबित होता है। जिस प्रकार एक पुष्प सुगंध से वातावरण को महका देता है उसी प्रकार संस्कृति पूरे देश को विश्व में महका देती है।


  • हमारी भारतीय संस्कृति में वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी जुड़ा हुआ है । सूर्य नमस्कार करना, दूसरों को प्रणाम करना ,बड़ों का आदर करना और छोटों से स्नेह करना यही हमारी संस्कृति को दर्शाती हैं। वर्तमान परिपेक्ष में आई हुई इस महामारी में संस्कृति हमें यह सिखाती है कि सुबह -सुबह व्यायाम करने से, सूर्य नमस्कार करने से, दूसरों को केवल हाथ जोड़कर प्रणाम करने से अनेक बीमारियों से बच सकते हैं।


  • सुसमृद्ध देश को बनाने के लिए सुसंस्कृत नागरिक बनना अति आवश्यक है। “निजपरशासनफिर अनुशासन” कहा भी गया है। स्वयं को अनुशासित रखते हुए ही हम अपने समाज अपने देश और अपने देश की संस्कृति को चारों दिशाओं में विस्तारित कर सकते हैं।



  • जिस प्रकार एक शरीर में हृदय तो है लेकिन उसमें धड़कन ना हो तो शरीर का कोई महत्व नहीं उसी प्रकार किसी देश की संस्कृति का सम्मान ना हो तो वह देश मृत है। देश को जीवंत बनाए रखने के लिए हमें हमारी संस्कृति से प्रेम करना चाहिए, उसका पालन करते हुए हम अपने देश को समृद्धि की राह पर अग्रसर कर सकते हैं और विश्व में ख्याति प्राप्त कर सकते हैं।

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